वक़्त छोड़ता है
अपने निशान-
चेहरों पे उभर
आई रेखाओं में
शेल्फ में रखी
किताबों के पीले
होते पन्नों में
देर रात रेडिओ
पे बजते पुराने
गीतों की आवाज़ में
दोस्तों को लिखे गए
खतों के जवाब के
इंतज़ार में.......
अपने निशान-
चेहरों पे उभर
आई रेखाओं में
शेल्फ में रखी
किताबों के पीले
होते पन्नों में
देर रात रेडिओ
पे बजते पुराने
गीतों की आवाज़ में
दोस्तों को लिखे गए
खतों के जवाब के
इंतज़ार में.......
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