Thursday, January 20, 2011

Walking in the Rain
As the drops of rain trickled down the window sill
I kept watching it standing silent and still
Though I can’t say with certainty
how far had my thoughts walked away
on that rainy- rainy day
The peacock had its share of dance
The frogs in the nearby pond
Kept croaking all day long
the little girl with her paper boat
tried hard to keep it afloat
Landscape got painted afresh in green
Sight wondrous than this ever been?
 
खिलखिलाती...


मेरे समय
के आँगन में
कई हिस्से हैं
और हर हिस्से में कई किस्से
छिपे हैं
कहीं सर्दी में गिरती
धूप की किरने कैद हैं
तो कहीं बारिश की कुछ
बूंदे छम छम करती हैं,
कहीं किसी कोने में u
क ख ग... a b c d
के वो सबसे पहले
सीखे हुए   स्वर गूंजते हैं
तो उधर कहीं किसी पुराने से बक्से में
बचपन में सुनी कहानियो
पे रचे नाटक आज
तक खेलते हैं
कहीं किसी हिस्से में दोस्तों
से हुई अनबन की गांठे हैं
वहीँ कहीं साथ में
कुछ दोस्तों की मस्ती भरी यादें भी हैं
पुरानी तस्वीरों से झांकते चेहरे
पूरी मासूमियत से आज की
तरफ देखते हैं
मैं गिरती पड़ती दौड़ती भागती सी
उन सारी गलियों में घूम कर आती हूँ
जहाँ जहाँ से छोटी आँखों में उतरे
कई टेढ़े मेढ़े छोटे बड़े सपने
घर से निकल कर गुज़रे थे.
बस अभी अभी आ कर रुकी हूँ
थमी हूँ, आज के सिरहाने पर
एक झपकी ले लूँ
फिर चल दूंगी अपने समय की सैर पर

tireless...

समय के महीन धागों से
बुनी चादर अब
बूढी होती माँ से
बंधती नहीं,
खुलती जाती है
एक सिरे से
दूसरे सिरे तक,
जैसे अंतहीन सब्र में
मुंदी हुई आँखें
खुल गयी हों
किसी सपने के
खटके से.....