Monday, December 26, 2011

फ़ोन की 
घंटी बजती है 
और हाथ न जाने 
क्यूँ उसकी 
घनघनाहट सुनते ही 
कोट की जेब में 
होकर भी ठन्डे पड़ जाते हैं
कांपते हाथों से
 रिसीवर को कान से 
लगाकर जैसे ही 
हेल्लो! कहती हूँ 
और मन ही मन 
ये दुआ करती हूँ 
की आज तो 
चुप की आवाज़ 
मुझे सुनाई दे जाये....
     पर---
वही चीरती हुई 
एक गुज़ारिश
फिर उस तरफ से 
     क्या आप होम लोन लेना चाहेंगे!!!!!?????


No comments:

Post a Comment