बादलों के घने
जंगलों में सपनो
के ऊँचे ऊँचे पेड़ों
पर बने घोसलों
में रख दिए हैं
मैंने अपने कुछ दिन....
ऐसे दिन -
जिनके पलों ने
हंसती हुई
आँखों से गिरते
मोतियों को पिरोया...
ऐसे दिन -
जिसके आँगन में
गिरती धूप की हर किरण
ने अँधेरे कोनों को नहलाया
ऐसे दिन-
जिसके हर ढलते सूरज
चाँद और तारों ने
यादों को जीवंत बनाया......
जंगलों में सपनो
के ऊँचे ऊँचे पेड़ों
पर बने घोसलों
में रख दिए हैं
मैंने अपने कुछ दिन....
ऐसे दिन -
जिनके पलों ने
हंसती हुई
आँखों से गिरते
मोतियों को पिरोया...
ऐसे दिन -
जिसके आँगन में
गिरती धूप की हर किरण
ने अँधेरे कोनों को नहलाया
ऐसे दिन-
जिसके हर ढलते सूरज
चाँद और तारों ने
यादों को जीवंत बनाया......
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