Sunday, December 4, 2011

बादलों के घने 
जंगलों में सपनो 
के ऊँचे ऊँचे पेड़ों 
पर बने घोसलों 
में रख दिए हैं 
मैंने अपने कुछ दिन....
ऐसे दिन -
जिनके पलों ने 
हंसती हुई
आँखों से गिरते 
मोतियों को पिरोया...
ऐसे दिन -
जिसके आँगन में 
गिरती धूप की हर किरण 
ने अँधेरे कोनों को नहलाया 
ऐसे दिन-
जिसके हर ढलते सूरज
चाँद और तारों ने 
यादों को जीवंत बनाया......



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