दूरीयों का एहसास
होता है -
जब घर से निकलने
के बहाने कम होने लगते हैं
जब रात को तारों
से दोस्ती गहराने लगती है
जब टेबल पे रखे-रखे
चाय ठंडी होने लगती है
जब खुश होने का
मतलब एक मुस्कान
भर में ढल जाता है
और
जब दो चार कदमो
का सफ़र अपरिचित
गलियों में गुम होने
लगता है........
होता है -
जब घर से निकलने
के बहाने कम होने लगते हैं
जब रात को तारों
से दोस्ती गहराने लगती है
जब टेबल पे रखे-रखे
चाय ठंडी होने लगती है
जब खुश होने का
मतलब एक मुस्कान
भर में ढल जाता है
और
जब दो चार कदमो
का सफ़र अपरिचित
गलियों में गुम होने
लगता है........
yup.......... and a lot more..........
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