Tuesday, February 15, 2011

quest...

मैं खुश हूँ
न जाने क्यों
फ़िर भी आँखों में
पानी जम सा रहा है

मैं खुश हूँ
न जाने क्यों
फ़िर भी मन और दिमाग की नसे
एक दूसरे में
गुथ रही हैं

मैं खुश हूँ
न जाने क्यों
फ़िर भी मेरे घर की
खिड़कियों में
दरारें पड़ रहीं हैं

मैं खुश हूँ
न जाने क्यों
फ़िर भी मेरे दोस्त
मुझसे नाराज़ हो
कट कट से रहें हैं

मैं खुश हूँ
न जाने क्यों
फ़िर भी शाम की चाय
से अदरक का स्वाद
खो रहा है

मैं खुश हूँ
फ़िर भी
क्यूंकि मैं अनभिज्ञ
नही हूँ किसी भी दर्द से

मैं खुश हूँ
क्यूंकि, मैं दुःख की
सटीक परिभाषा की
तलाश में हूँ .........

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