an endeavour...
Wednesday, February 16, 2011
बचपन में
पढ़ी कहानियों
की किसी किताब
में मैंने
संभालकर रखा था
एक फूल
की पंखुड़ियों को
इस सपने के
साथ की
वो वैसे ही
रहेंगे सदा
अपरिपक्व मन
को ये समझ
कहाँ थी की
मेरे साथ साथ
उम्रदराज़ हो जायेंगे
वो भी......
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