"एक कविता का सिरा
तुम्हारे दुःख की लय में बींधता
रहता है हर पल...
शब्द हैं जो फूल बन
गूँथ जाते हैं पूजा की माला
में हर दिन...
और इस तरह एक अधूरी कविता
अनकहे शब्दों से
मिलती रहती है सिर्फ़ मन ही मन ......"
तुम्हारे दुःख की लय में बींधता
रहता है हर पल...
शब्द हैं जो फूल बन
गूँथ जाते हैं पूजा की माला
में हर दिन...
और इस तरह एक अधूरी कविता
अनकहे शब्दों से
मिलती रहती है सिर्फ़ मन ही मन ......"
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