हर रोज़
कितना कुछ
घटता रहता है...
घोटाले
बलात्कार
scandels
हत्याएं
और ऐसा ही
कितना कुछ....
ख़बरों के बाज़ार में
मीडिया और
अखबार
पल पल
हर घटना को
मनोहर कहानियों
में तब्दील
कर
परोस रहें हैं
बेपरवाह लगातार
उन सब बेचैन
आँखों के
लिए
जिन्हें अब नशीली
दुनिया
की आदत
लग चुकी है....
जो काले चश्मे
पहन कर जो
कुछ
घट रहा है
उसका लुफ्त उठा रहे
हैं
और इंसान की
कीमत उसकी खबर
से लगा रहे हैं.....
कितना कुछ
घटता रहता है...
घोटाले
बलात्कार
scandels
हत्याएं
और ऐसा ही
कितना कुछ....
ख़बरों के बाज़ार में
मीडिया और
अखबार
पल पल
हर घटना को
मनोहर कहानियों
में तब्दील
कर
परोस रहें हैं
बेपरवाह लगातार
उन सब बेचैन
आँखों के
लिए
जिन्हें अब नशीली
दुनिया
की आदत
लग चुकी है....
जो काले चश्मे
पहन कर जो
कुछ
घट रहा है
उसका लुफ्त उठा रहे
हैं
और इंसान की
कीमत उसकी खबर
से लगा रहे हैं.....
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