करवट लेते ही
किसी ख्वाब
की नींद टूटती है
कुछ वैसे जैसे ----
किसी ने रफ़्तार
पकडती रेलगाड़ी
की ज़ंजीर खींच कर
उसे बियावान जंगल
में रोक दिया हो.....
जैसे गंगा के गर्भ
में विसर्जित
दुर्गा की प्रतिमा
को पानी में घुलने
से पहले ही किसी ने
बाहर निकाल दिया हो...
जैसे चैन से दाने चुगती
चिड़िया पे बहेलिये
ने अपना जाल फ़ेंक
कैद कर लिया हो...
जैसे बंदरगाह के
करीब पहुँचते जहाज को
बवंडर ने तहस नहस किया हो....
किसी ख्वाब
की नींद टूटती है
कुछ वैसे जैसे ----
किसी ने रफ़्तार
पकडती रेलगाड़ी
की ज़ंजीर खींच कर
उसे बियावान जंगल
में रोक दिया हो.....
जैसे गंगा के गर्भ
में विसर्जित
दुर्गा की प्रतिमा
को पानी में घुलने
से पहले ही किसी ने
बाहर निकाल दिया हो...
जैसे चैन से दाने चुगती
चिड़िया पे बहेलिये
ने अपना जाल फ़ेंक
कैद कर लिया हो...
जैसे बंदरगाह के
करीब पहुँचते जहाज को
बवंडर ने तहस नहस किया हो....
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