किस ख़ुदा की
बन्दिगी में
सर झुकाऊं
किस ईश्वर
के चरणों में
आरती के फूल
चढाऊं
चारों ओर घिरे
अन्धकार
में कोई रौशनी
दिखती नहीं
किस ईसा में
आस्था करूँ
ऐसा समय है
ये भी
की धर्मनिष्ठ बन्दों
को भी देखा
जिनके दीपों
से ज्योति नहीं
ज्वाला धधकी
और ध्वस्त होती
रही इंसा-नीयत....
ऐसे विषम समय में
किस देवालय में जाकर
इक इंसान से मिलूं ??
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