Saturday, September 3, 2011

किस ख़ुदा की
बन्दिगी में 
सर झुकाऊं 
किस ईश्वर
के चरणों में 
आरती के फूल
चढाऊं 
चारों ओर घिरे 
अन्धकार 
में कोई रौशनी 
दिखती नहीं
किस ईसा में
आस्था करूँ
ऐसा समय है 
ये भी
की धर्मनिष्ठ बन्दों
को भी देखा
जिनके दीपों 
से ज्योति नहीं
ज्वाला धधकी 
और ध्वस्त होती
रही इंसा-नीयत....

ऐसे विषम समय में 
किस देवालय में जाकर 
इक इंसान से मिलूं ??




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