सम्पूर्ण जीवन एक गतिमय छाया
गोधुली अनुभूति में नहाया
निरंतर स्तब्ध! विचरता जीवन
विपरीत विचारों में किसी
संधी की गुंजाईश से परे
संधी की गुंजाईश से परे
जूझता, खंगालता-
उस ''मै'' को जो
उपस्थित है
बेसबब ढूंढता-
उसे ''मै'' को भी
जो चिंतन में विलीन है
वो अनुपस्थित साया....
सम्पूर्ण जीवन एक गतिमय छाया
सम्पूर्ण जीवन दृश्य और अदृश्य माया......
उपस्थित है
बेसबब ढूंढता-
उसे ''मै'' को भी
जो चिंतन में विलीन है
वो अनुपस्थित साया....
सम्पूर्ण जीवन एक गतिमय छाया
सम्पूर्ण जीवन दृश्य और अदृश्य माया......
No comments:
Post a Comment