Saturday, September 10, 2011

सम्पूर्ण जीवन एक गतिमय छाया
   गोधुली अनुभूति में नहाया
   निरंतर स्तब्ध! विचरता जीवन 
   विपरीत विचारों में किसी
   संधी की गुंजाईश से परे 
   जूझता, खंगालता-
   उस ''मै'' को जो
   उपस्थित है
   बेसबब ढूंढता-
   उसे ''मै'' को भी
   जो चिंतन में विलीन है
   वो अनुपस्थित साया....


सम्पूर्ण  जीवन एक गतिमय छाया
सम्पूर्ण जीवन दृश्य और अदृश्य माया......

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