आकांछाएं
कुछ इस तरह उडती
हैं
मानो धरती से कोई
वास्ता न हो
आकांछाएं
कुछ यूँ गाती हैं
मानो हर सुर
में उसकी आत्मा बस्ती हो
आकांछाएं
कुछ यूँ बहती हैं
मानो सागर ही उसका
प्रियतम हो
आकांछाएं
कुछ यूँ चमकती हैं
मानो सूर्य किरणों से
नहाई हो....
आकांछाएं
कुछ यूँ फैलती हैं
मानो जीवन अमर हो ........
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