Monday, August 8, 2011

अनायास ही
राहों में कुछ 
बिछड़े हुए पल मिले 
और हाथ यूँ ही
आगे बढ़ गए....
वो शायद चुनना चाहते
थे कुछ सपनो को...
और थम कर 
 छू लेना चाहते थे
उस चेहरे पे टिकी
मुस्कान को...
जिसे अनगिनत 
लम्हें लगे 
होठों तक आने में....

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