Monday, June 6, 2011





वो खामोश थी
उस दिन जब
माँ ने तोड़
दी थी उसकी
कलम
वो खामोश
थी उस दिन
जब उसे सौंप
दिया गया था
अजनबी हाथों
में,
वो खामोश थी
उस दिन
जब जलीं  थीं  
रोटियों की
भांप से
उसकी हथेलियाँ..
वो खामोश थी
उस दिन
जब उसकी
आवाज़ पे
अजनबी ने
लगाये थे
ताले..
वो सिर्फ एक
बार चीखी
जब की
गयी ख़ामोशी
से उसकी
नन्ही भ्रूण की हत्या.....

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