वो खामोश थी
उस दिन जब
माँ ने तोड़
दी थी उसकी
कलम
वो खामोश
थी उस दिन
जब उसे सौंप
दिया गया था
अजनबी हाथों
में,
वो खामोश थी
उस दिन
जब जलीं थीं
रोटियों की
भांप से
उसकी हथेलियाँ..
वो खामोश थी
उस दिन
जब उसकी
आवाज़ पे
अजनबी ने
लगाये थे
ताले..
वो सिर्फ एक
बार चीखी
जब की
गयी ख़ामोशी
से उसकी
नन्ही भ्रूण की हत्या.....
No comments:
Post a Comment