सड़कों पे, गलियों में
प्लेटफार्म पे, मंदिरों में
ठसाठस भरी रेलों में
बसों में
आते जाते
अनगिनत चेहरे ही चेहरे!
छोटे छोटे शरारती
बच्चों के,
घर की खटर-पटर से
फ़ुर्सत लेती औरतों के,
बॉस की तानाशाही से
परेशां मुलाज़िमो के,
बेरोज़गारी की मार खाते
लाखों नौजवानों के,
बुढ़ापे का दर्द झेलते
नाना नानियों के,
कन्धों पे कुदार का
भार उठाये मेहनतकशों के,
कुछ खोये से
कुछ परेशान से
कुछ हँसते हुए
कुछ मायूस से
हर दिन हर घडी
यहाँ से वहां
कहीं से निकले
कहीं को जाते हुए
चेहरे ही चेहरे!
इन सब अजनबी
चेहरों को देखकर यही लगता
है कि -
हर चेहरे की आँखों का पानी
खारा-खारा सा होगा
हर चेहरे में कोई
और भी चेहरा कैद होगा
हर चेहरे की कहानी
को रचने वाला कोई
माहिर कलाकार होगा ....
प्लेटफार्म पे, मंदिरों में
ठसाठस भरी रेलों में
बसों में
आते जाते
अनगिनत चेहरे ही चेहरे!
छोटे छोटे शरारती
बच्चों के,
घर की खटर-पटर से
फ़ुर्सत लेती औरतों के,
बॉस की तानाशाही से
परेशां मुलाज़िमो के,
बेरोज़गारी की मार खाते
लाखों नौजवानों के,
बुढ़ापे का दर्द झेलते
नाना नानियों के,
कन्धों पे कुदार का
भार उठाये मेहनतकशों के,
कुछ खोये से
कुछ परेशान से
कुछ हँसते हुए
कुछ मायूस से
हर दिन हर घडी
यहाँ से वहां
कहीं से निकले
कहीं को जाते हुए
चेहरे ही चेहरे!
इन सब अजनबी
चेहरों को देखकर यही लगता
है कि -
हर चेहरे की आँखों का पानी
खारा-खारा सा होगा
हर चेहरे में कोई
और भी चेहरा कैद होगा
हर चेहरे की कहानी
को रचने वाला कोई
माहिर कलाकार होगा ....
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