आज कल ऐसे ख्वाब आते है दबे पाँव,
जिनके आने से आँखों में डर की स्याही
और भी गहरी होती जा रही है
ख्वाब लिख रहें हैं ऐसी कहानियां
जिनके किरदार भी सहमे सहमे से
फिर रहे हैं चुपचाप सुनसान
गलियों से ढूंढते हुए
अपना घर अपनी पहचान
इनके बेबस दिलों में बैठे हैं
वो सारे सवाल
जिनके जवाब ख्वाब
ने छुपा कर रखे हैं
अपनी कहानियों के
शीश महल में
जहाँ पहुँच कर भी
मुश्किल है रूबरू होना
जवाबों से सालों साल
कि हर जवाब यहाँ आईना है
जिसके आर पार
पसरा हुआ है संसार का मायाजाल .......
जिनके आने से आँखों में डर की स्याही
और भी गहरी होती जा रही है
ख्वाब लिख रहें हैं ऐसी कहानियां
जिनके किरदार भी सहमे सहमे से
फिर रहे हैं चुपचाप सुनसान
गलियों से ढूंढते हुए
अपना घर अपनी पहचान
इनके बेबस दिलों में बैठे हैं
वो सारे सवाल
जिनके जवाब ख्वाब
ने छुपा कर रखे हैं
अपनी कहानियों के
शीश महल में
जहाँ पहुँच कर भी
मुश्किल है रूबरू होना
जवाबों से सालों साल
कि हर जवाब यहाँ आईना है
जिसके आर पार
पसरा हुआ है संसार का मायाजाल .......
No comments:
Post a Comment