मेरा घर गली के अंतिम
छोर पे है
हर रोज़ मैं गली
पार कर के स्कूल जाती
हूँ
हर रोज़ घर से निकलते
वक़्त मैं एक
छोटी सी दुआ मांगती हूँ
कि -
कल जब मैं ये गली
पार करूँ तो
मेरी आंखें ज़मीन
को देखते हुए
नहीं बल्कि
आकाश में उड़ते
पक्षियों का पीछा करें
और मेरा दुपट्टा
मेरी सुरक्षा नहीं
बल्कि मेरा पंख बन जाये ........
छोर पे है
हर रोज़ मैं गली
पार कर के स्कूल जाती
हूँ
हर रोज़ घर से निकलते
वक़्त मैं एक
छोटी सी दुआ मांगती हूँ
कि -
कल जब मैं ये गली
पार करूँ तो
मेरी आंखें ज़मीन
को देखते हुए
नहीं बल्कि
आकाश में उड़ते
पक्षियों का पीछा करें
और मेरा दुपट्टा
मेरी सुरक्षा नहीं
बल्कि मेरा पंख बन जाये ........
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