चाँद धीरे-धीरे बादलों
के पर्दों के पीछे से
निकल रहा था
ठीक उस वक़्त जब
सूरज की कुछ अंतिम
किरणे सिमट रहीं थी
उन्ही पर्दों की सिलवटों
में--
और कहीं किसी आंगन
में कुछ बच्चे खेल खेल में
चाँद में अपने मामा को बुला
रहे थे....
वहीँ कहीं
कुछ दूर उस अँधेरी
गली के मोड़ पे
बसे बस्ती में कुछ
बच्चे चाँद में रोटियों
की कल्पना करते करते
निष्ठुर रात की
गोद में सो रहे थे
पर उनके सपनों में
शायद सूरज की सुनहली
किरणे अब भी जाग रही थीं ..........
के पर्दों के पीछे से
निकल रहा था
ठीक उस वक़्त जब
सूरज की कुछ अंतिम
किरणे सिमट रहीं थी
उन्ही पर्दों की सिलवटों
में--
और कहीं किसी आंगन
में कुछ बच्चे खेल खेल में
चाँद में अपने मामा को बुला
रहे थे....
वहीँ कहीं
कुछ दूर उस अँधेरी
गली के मोड़ पे
बसे बस्ती में कुछ
बच्चे चाँद में रोटियों
की कल्पना करते करते
निष्ठुर रात की
गोद में सो रहे थे
पर उनके सपनों में
शायद सूरज की सुनहली
किरणे अब भी जाग रही थीं ..........
bravoo!! proud of u
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