क्या पता ....
अच्छा है की तुम ये
बाज़ार काला चश्मा
लगा कर देख रहे हो
उसकी धुप छाँव वाली रौशनी
में तुम एक सुनहली दुनिया
की तस्वीर की कल्पना कर रहे हो ....
वरना क्या पता तुम भी एक
आतंकवादी करार कर दिए जाते
अगर चश्मा हटाकर तुमने
बदलते दौर का दृश्य
खुली आँखों से देखा लिया होता!
और तुम्हारी बेचैन रूह ने
तुम्हे जंग के लिए
तैयार कर दिया होता .!!........
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अच्छा है की तुम ये
बाज़ार काला चश्मा
लगा कर देख रहे हो
उसकी धुप छाँव वाली रौशनी
में तुम एक सुनहली दुनिया
की तस्वीर की कल्पना कर रहे हो ....
वरना क्या पता तुम भी एक
आतंकवादी करार कर दिए जाते
अगर चश्मा हटाकर तुमने
बदलते दौर का दृश्य
खुली आँखों से देखा लिया होता!
और तुम्हारी बेचैन रूह ने
तुम्हे जंग के लिए
तैयार कर दिया होता .!!........
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yaar ye khyal aate kahan se hain...
ReplyDeletesimply superb