मेरी आँखों में
रौशनी नहीं पर
मेरे मन में अंधकार नहीं
मेरे पैरों में हरकत नहीं
पर मेरी हिम्मत कम नहीं
मेरी आवाज़ में गूँज नहीं
पर मेरे जज़्बात बेज़ुबां नहीं
मेरे कान सुन सकते नहीं
पर मैं शोर से अनजान नहीं
घेरती हैं काली घटाएं मुझे भी
बरसात की बूंदों में भीगता है
मेरा आँचल भी
सूर्य की किरणों से मिलती
है रौशनी मुझे भी
चाँद और तारों से बातें
करता हूँ मैं भी
हवाएं देती हैं एहसास
परों के होने का मुझे भी
सपनों की सुनहरी दुनिया
बसती है मेरी आखों में भी....
ये सब ही तो करते हैं मुझे पूर्ण
इनकी छाया में हूँ मैं महफूज़.....
रौशनी नहीं पर
मेरे मन में अंधकार नहीं
मेरे पैरों में हरकत नहीं
पर मेरी हिम्मत कम नहीं
मेरी आवाज़ में गूँज नहीं
पर मेरे जज़्बात बेज़ुबां नहीं
मेरे कान सुन सकते नहीं
पर मैं शोर से अनजान नहीं
घेरती हैं काली घटाएं मुझे भी
बरसात की बूंदों में भीगता है
मेरा आँचल भी
सूर्य की किरणों से मिलती
है रौशनी मुझे भी
चाँद और तारों से बातें
करता हूँ मैं भी
हवाएं देती हैं एहसास
परों के होने का मुझे भी
सपनों की सुनहरी दुनिया
बसती है मेरी आखों में भी....
ये सब ही तो करते हैं मुझे पूर्ण
इनकी छाया में हूँ मैं महफूज़.....
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