Sunday, June 10, 2012

मेरी आँखों में 
रौशनी नहीं पर 
मेरे मन में अंधकार नहीं 
मेरे पैरों में हरकत नहीं 
पर मेरी हिम्मत कम नहीं 
मेरी  आवाज़ में गूँज नहीं 
पर मेरे जज़्बात बेज़ुबां नहीं 
मेरे कान सुन सकते नहीं 
पर मैं शोर से अनजान नहीं 
         घेरती हैं काली घटाएं मुझे भी 
         बरसात की बूंदों में भीगता है 
         मेरा आँचल भी 
         सूर्य की  किरणों से मिलती 
         है रौशनी मुझे भी 
         चाँद और तारों से बातें 
         करता हूँ मैं भी 
         हवाएं देती हैं एहसास 
         परों के होने का मुझे भी
         सपनों की सुनहरी दुनिया 
         बसती है मेरी आखों में भी....
                       ये सब ही तो करते हैं मुझे पूर्ण 
                       इनकी छाया में हूँ मैं महफूज़.....
                    

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