उठो !!
कि वक़्त कम है
जीने का
देखो !!
कि ख़त्म हो रही
है सुन्दरता
चलो !!
कि बढ़ रहीं है
दूरियां
संभलो !!
कि हर डगर पे
लगे हैं गति-रोधक
छू लो !!
कि सुना है तारे
ढूंढ रहे है नया असमान
थाम लो !!
कि रिश्तों में
आ रही है खटास
ढूंढ लो !!
कि कल शायद
न मिले कोई एहसास।.......
कि वक़्त कम है
जीने का
देखो !!
कि ख़त्म हो रही
है सुन्दरता
चलो !!
कि बढ़ रहीं है
दूरियां
संभलो !!
कि हर डगर पे
लगे हैं गति-रोधक
छू लो !!
कि सुना है तारे
ढूंढ रहे है नया असमान
थाम लो !!
कि रिश्तों में
आ रही है खटास
ढूंढ लो !!
कि कल शायद
न मिले कोई एहसास।.......
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