मैंने एक शहर देखा
सागर के किनारों पे ठहरा सा
निरंतर घटती बढती लहरों
कि धडकनों पे जगता सा---
रेल कि पटरियों पे
आती जाती ट्रेनों में
लाखों ख्वाहिशों सपनों और
कच्चे पक्के इरादों से
भरी बोगियों सा---
असमान से भी आगे
ले जाएँ ऐसी हज़ारों
इमारतों तक जाती राहों
पे भागती भीड़ में खोया सा----
चमकीली धूप के दुपट्टों
में लिपटा सा
सर्द हवा के पंखों पे सवार
neon lights में
जगमगाता सा
taxi के मीटरों में
भागता सा
भागता सा
मैंने एक शहर देखा-----
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