Friday, July 22, 2011

यादें बिन बादल
बरस जाया करती हैं
रंगों  में जब
उनकी बूँदें
गिरती हैं
वो और गहरे
से हो जाते हैं...
गीली मिट्टी
से उठती सोंधी
खुशबु
हवाओं से दो चंद
बातें कर लेती है..
खिडकियों पे थपकियाँ
सी देती बूंदे
उनीदीं आँखों
को सुला जाती हैं....

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