Saturday, April 23, 2011

इतनी तीव्र
होती है
एक चुप की गूंज.
की ढह सकता
है बाँध
और डूब सकते
हैं कई ख्वाब  
बस यूँ ही.....

इतनी तेज़
होती है
एक चुप की आंच
की फूट
सकता  है
ज्वालामुखी
और जल
सकते हैं
उम्मीदों के कई पंख
बस यूँ ही.....

1 comment:

  1. good bahut achhi kavita hai. mai pahali bar jana ap kavita bhi karati hai.

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