Monday, April 4, 2011

धानी रंग की
चादर
पे जैसे
किसी ने चिपका
दिया है
गुलाबी टिकलियों को..
धरती पे गिरे
नीले पर्दों
पर जैसे
चला दिया है
किसी ने
सूरज के पीछे
छुपकर
एक रंगों में
रचे चलचित्र को.....


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