प्रेम।
अन्धकार है
सितारों के इर्द गिर्द फैला सा...
प्रेम ?
मरुस्थल है
मृगजल में झिलमिलाता सा ....
प्रेम ?
काजल है
नैनो के सागर पे ठहरे किनारों सा ...
प्रेम ?
आँगन है
घर के किवाड़ों को खोलता सा ...
प्रेम ?
विस्तार है
मन की गिरह में संकुचित सा ....
अन्धकार है
सितारों के इर्द गिर्द फैला सा...
प्रेम ?
मरुस्थल है
मृगजल में झिलमिलाता सा ....
प्रेम ?
काजल है
नैनो के सागर पे ठहरे किनारों सा ...
प्रेम ?
आँगन है
घर के किवाड़ों को खोलता सा ...
प्रेम ?
विस्तार है
मन की गिरह में संकुचित सा ....
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