वो कहना चाहता
था किसी से--
जुबां पे जो बात
आकर रुकी थी
वो दिखाना चाहता
था किसी को --
जज़्बात जो ह्रदय
के सिरहाने सो गए थे
वो थिरकना चाहता
था किसी के साथ--
उन धुनों पे
जो शब्दों में उलझ
गए थे
वो मनाना चाहता
था किसी को --
देकर कुछ ख्वाब
जो मिट कर
तारे बन गए थे
वो पिरोना चाहता
था किसी के लिए--
हार जिनके मोती
सागर की गहराईयों
में जा छुपे थे
वो चलना चाहता था
किसी को लिए ---
उन बादलों पे
जो घटायें बन
बरस चुके थे.....
था किसी से--
जुबां पे जो बात
आकर रुकी थी
वो दिखाना चाहता
था किसी को --
जज़्बात जो ह्रदय
के सिरहाने सो गए थे
वो थिरकना चाहता
था किसी के साथ--
उन धुनों पे
जो शब्दों में उलझ
गए थे
वो मनाना चाहता
था किसी को --
देकर कुछ ख्वाब
जो मिट कर
तारे बन गए थे
वो पिरोना चाहता
था किसी के लिए--
हार जिनके मोती
सागर की गहराईयों
में जा छुपे थे
वो चलना चाहता था
किसी को लिए ---
उन बादलों पे
जो घटायें बन
बरस चुके थे.....
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