Friday, August 17, 2012

वो कहना चाहता 
था किसी से--
जुबां पे जो बात 
आकर रुकी थी
वो दिखाना चाहता 
था किसी को --
जज़्बात जो ह्रदय 
के सिरहाने सो गए थे 
वो थिरकना चाहता 
था किसी के साथ--
उन धुनों पे 
जो शब्दों में उलझ 
गए थे 
वो मनाना  चाहता 
था किसी को --
देकर कुछ ख्वाब 
जो मिट कर 
तारे बन गए थे
वो पिरोना चाहता 
था किसी के लिए--
हार जिनके मोती 
सागर की गहराईयों 
में जा छुपे थे 
वो चलना  चाहता था 
किसी को लिए ---
उन बादलों पे 
जो घटायें बन 
बरस चुके थे.....
         
        
         


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